क्या मिला

एंथ्रोपिक ने 23 सितंबर को बताया कि क्लॉड ने बैक्टीरियोफ़ाज — यानी बैक्टीरिया को संक्रमित करने वाले वायरस — के डीएनए में एक ऐसा एंज़ाइम तंत्र पहचाना है जिसका पहले कोई विवरण नहीं था। कंपनी इसे मैट्रिक्स-संबद्ध रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज़, या ART, कहती है।

एक ART तंत्र के तीन हिस्से हैं: एक रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज़ एंज़ाइम, एक सहयोगी जीन, और समान अंतराल पर दोहराए जाने वाले डीएनए अनुक्रमों की एक शृंखला जो CRISPR शृंखला जैसी दिखती है। यही समानता दिलचस्प है। दोहराव की शृंखलाएँ ही CRISPR को प्रोग्राम करने योग्य बनाती हैं, और किसी असामान्य रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज़ के बग़ल में ऐसी शृंखला एक ऐसी संरचना है जिसे किसी ने सूचीबद्ध नहीं किया था।

खोज उसी पैमाने पर चली जो इस पूरी कवायद का मक़सद है। क्लॉड के एजेंटों ने एक डीएनए अनुक्रम डेटाबेस खंगाला, दो लाख से अधिक रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज़ जुटाए, लगभग 3,500 संभावित तंत्र चिह्नित किए और उन्हें घटाकर बीस पर लाए जिन्हें नज़दीक से देखना बनता था। एक एजेंट ने उस असामान्य जीन के पास दोहराव का पैटर्न पकड़ा। एंथ्रोपिक कुल आँकड़ा लगभग 950 एजेंट, क़रीब 21 घंटे और 21 करोड़ टोकन बताती है।

प्रयोगशाला की मेज़ पर काम करता लैब कोट पहने एक वैज्ञानिक
एंथ्रोपिक की प्रयोगशाला केवल जैवसुरक्षा स्तर 1 और 2 पर काम करती है। प्रतीकात्मक स्टॉक तस्वीर। Mikhail Nilov · pexels · Pexels License

एंथ्रोपिक क्या दावा नहीं कर रही

कंपनी सीमाओं को लेकर असामान्य रूप से सतर्क है, और असली कहानी उन्हीं सीमाओं में है।

क्लॉड ने कोई प्रयोग नहीं किया। सारा प्रयोगशाला काम — मानक प्रयोगशाला स्ट्रेन में प्रोटीन का अभिव्यक्तिकरण, उसका जैवरासायनिक विश्लेषण — एंथ्रोपिक की सैन फ़्रांसिस्को खाड़ी क्षेत्र वाली प्रयोगशाला में मानव वैज्ञानिकों ने किया। वह प्रयोगशाला इसी वसंत खुली और केवल जैवसुरक्षा स्तर 1 और 2 पर काम करती है, मानव रोगजनकों के बिना।

कार्य ज्ञात नहीं है। शुरुआती प्रयोगों में दिखा कि ART शृंखला अलग-अलग छोटे आरएनए अणुओं के रूप में अभिव्यक्त होती है — वही जो अपेक्षित होता यदि यह तंत्र CRISPR की तरह प्रोग्राम करने योग्य होता। एंथ्रोपिक के अपने शब्द हैं कि “हमें अभी इसका कार्य नहीं पता”।

और यह पूरी तरह अभूतपूर्व भी नहीं है। मुख्य कार्यकारी डारियो अमोदेई ने कहा कि यह तंत्र “अधिकांशतः, हालाँकि पूरी तरह नहीं, क्लॉड द्वारा” खोजा गया, और माना कि स्टैनफ़ोर्ड के शोधकर्ता पहले एक ऐसा तंत्र बता चुके हैं जो कुछ मायनों में इससे मिलता-जुलता है।

प्रयोगशाला के स्टैंड में रखी नमूना नलियों की क़तारें
लगभग 3,500 संभावित तंत्रों को घटाकर बीस किया गया। प्रतीकात्मक स्टॉक तस्वीर। Tahir Xəlfəquliyev · pexels · Pexels License

यह नतीजा क्यों गिना जाए

एमआईटी के फ़ेंग झांग, जिन्होंने CRISPR को औज़ार बनाने में भूमिका निभाई, ने इसे “इस बात का रोमांचक उदाहरण कि एआई एजेंट जैविक खोज में कैसे योगदान दे सकते हैं” कहा। यह एंज़ाइम से अधिक विधि का समर्थन है, और इस चरण पर यही उचित भी है।

विधि ने जो किया वह तुलनात्मक जीनोमिक्स की ऐसी छानबीन थी जिसे कोई शोध समूह हाथ से करने की कोशिश नहीं करता, और उसके बाद यह निर्णय कि 3,500 में से कौन से बीस उम्मीदवार प्रयोगशाला समय के योग्य हैं। दोनों हिस्से अलग-अलग मानव शोधकर्ताओं की पहुँच में हैं। एक ही दिन में दोनों का मेल नया है।

एंथ्रोपिक ने एक प्रीप्रिंट प्रकाशित किया है और बाहरी समूहों को कार्यात्मक अध्ययन प्रस्तावित करने का न्योता दिया है। यह न्योता घोषणा का ईमानदार हिस्सा है, और यही उसकी परीक्षा भी। CRISPR जैसी दिखने वाली और छोटे आरएनए बनाने वाली संरचना आगे चलकर प्रोग्राम करने योग्य तंत्र निकल सकती है, बिना उपयोग वाला रक्षा तंत्र निकल सकती है, या बीच की कोई चीज़। इनमें से कौन-सी, यह अगले साल दूसरों की प्रयोगशालाओं में तय होगा, किसी कंपनी के ब्लॉग में नहीं।